उ. प्रो. के. की गतिविधियाँ

 

1. पेट्रोलियम और प्रकृतिक गैस मंत्रालय में, त्रैमासिक कार्य समीक्षा बैठक के लिए रिफाइनरियों के भौतिक कार्यों की समीक्षा :

त्रैमासिक कार्य समीक्षा बैठक के लिए उ. प्रो. के., सार्वजनिक की सभी रिफाइनरियों के निम्नलिखित भौतिक कार्यों से संबन्धित आँकड़े संकलित करता है:

  1. ऊर्जा कार्य :
    • विशिष्ट ऊर्जा उपभोग ( एम. बी. टी. यू. / बी. बी. एल. / एन. आर. जी. एफ. )
    • ईंधन और हानि ( कच्चे तेल पर % डबल्यूटी. )
    • हाइड्रोकार्बन हानि ( कच्चे तेल पर % डबल्यूटी. )
  2. कच्चे तेल का संवेशप्रवाह और क्षमता का उपयोग :
    • प्रसंस्कृत कच्चे तेल की मात्रा और प्रकार
    • यू. ई. सी. सी. से ई.सी.सी. के अनुपात के आधार पर प्रमुख प्रक्रिया इकाइयों की क्षमता का उपयोग
  3. उत्पाद प्रतिमान :
    • द्रवित पेट्रोलियम गैस ब्राण्ड
    • आसवन उपलब्धि ( हल्का, मध्यम और भारी )
    • पेट्रोल, डीज़ल, ल्यूब्स, आदि जैसे प्रमुख उत्पादों के उत्पादन आंकड़े

सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों के लिए वर्ष 2007 से प्रत्येक तिमाही त्रैमासिक कार्य समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें तिमाही के लिए रिफाइनरियों की कार्यों की तुलना पूर्व तिमाही से एवं वार्षिक कार्यों की तुलना पूर्व वर्ष से की जाती है।

उ. प्रों. के. रिफाइनरियों के कार्यों के विश्लेषण पर समोचित रिपोर्ट तैयार कर पेट्रोलियम और प्रकृतिक गैस मंत्रालय को प्रस्तुत करता है।

2. एकीकृत रिफाइनरी व्यवसाय सुधार कार्यक्रम ( IRBIP ) चरण-I सेल जीएसआई द्वारा 4 रिफाइनरियों में क्रियान्वित किया जा रहा है

बीपीसीएल कोच्चि,
आईओसीएल मथुरा,
सी.पी.सी.एल. मनाली और
एच.पी.सी.एल, विशाख

परियोजनाओं मे सुधार की स्वीकृति के साथ, मूल्यांकन चरण सभी 4 स्थलों पर पूरा कर लिया गया है।

स्वीकृत परियोजनाओं के कार्यान्वयन की कार्रवाई , प्रचालन एवं परिसपत्ति प्रबंधन को छोड़कर, वर्ष 2010 के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, सिवाय उन परियोजनाओ में सुधार (PFIs) के लिए, जिनके लिए रिफाइनरी के बंद करने की आवश्यकता होती है, जोकि वर्ष 2010 के अंत तक हो पाएगी।

3. रिफाइनरियों मे नई प्रक्रिया इकाईयों के लिए ऊर्जा कारकों के विकास एवं मौजूदा इकाईयों मे कारकों का पुनर्मूल्यन

नई प्रक्रिया इकाईयों और मौजूदा इकाईयों के ऊर्जा कारकों का पुनर्मूल्यन उ.प्रौ.के. की एक गतिमान गतिविधियों में से एक है और नियमित रूप से रिफाइनरियों के ऊर्जा निष्पादन के यथार्थवादी मूल्यांकन सतत रूप से की जाती है।

उ.प्रौ.के., उचित ऊर्जा कारकों के समनुदेशन के बाद, सभी रिफाइनरियों की विभिन्न प्रक्रिया इकाईयों के ऊर्जा निष्पादन का वार्षिक आधार पर मूल्यांकन करता है।

4. इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड – अनुसंधान एवं विकास केंद्र एवं भारत पेट्रोलियम कॉ. लि. – अनुसंधान एवं विकास केंद्र द्वारा, कोयले से द्रवित ईंधन प्रौद्योगिकी का विकास

ईआईएल (आर एंड डी) और बीपीसीएल (आर एंड डी) ने कोयले से द्रवित ईंधन परियोजना प्रस्ताव तैयार किया और इसे नवंबर 2007 में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 62वीं बैठक के दौरान विचारार्थ प्रस्तुत किया और बाद में अप्रैल 2008 में 63वीं बैठक के दौरान संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस परियोजना का उद्देश्य सिन(syn) गैस की सफाई और एफटी प्रक्रिया का विकास था, हालांकि गैसीकरण प्रोद्योगिकी का विकास इस परियोजना का हिस्सा नहीं है।

उ.प्रौ.के., बीपीसीएल (आर एंड डी) और ईआईएल (आर एंड डी) के बीच मार्च 2009 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

5. कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज एवं आईजीसीसी प्रोद्योगिकी “ पर एशिया पेसिफिक (APP6) सहभागिता के अंतर्गत संयुक्त अध्ययन में भाग लेना।कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज एवं आईजीसीसी प्रोद्योगिकी “ पर एशिया पेसिफिक (APP6) सहभागिता के अंतर्गत संयुक्त अध्ययन में भाग लेना।

उ.प्रौ.के. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रतिनिधि के रूप में स्वच्छ विकास और जलवायु पर APP6 की टास्क फोर्स में क्लीन फोसिल एनर्जी का हिस्सा रहा है।

इस कार्य बल ने पहले से ही उचित / कुशल प्रोद्योगिकियों की जलवायु पर प्रभाव को कम करने में, दुनिया की चिंता के समाधान में मदद करते हुए, विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए 13 परियोजनाओं की पहचान की है।

महत्वपूर्ण उत्सर्जन चिंताओं और शामिल दांव को देखते हुए, उ.प्रौ.के. ने समझदारी के लिए दो APP6 परियोजनाओं को चिन्हित किया है।

कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज एवं आईजीसीसी प्रोद्योगिकी” पर देश की ओर से विभिन्न तेल कंपनियों एवं शेकक्षिक संस्थाओं के बीच समन्वय का कार्य प्रगति पर है।
विद्युत मंत्रालय, उपरोक्त APP6 परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय एजेंसी है जिसके लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने मामले को उनसे चर्चा करने को कहा।

शामिल औपचारिकताओं को देखते हुए उ.प्रौ.के., अंतर्राष्ट्रीय सतत ऊर्जा एक्स्चेंज (ISEE), के तहत गतिविधियों में शामिल होने का प्रस्ताव, अंतर्राष्ट्रीय ईंधन क्वालिटी सेंटर (IFQC) और साथ ही सतत ऊर्जा पर यूनिसेफ समिति विभिन्न गतिविधियों में शामिल होने का प्रस्ताव रखा है।

6. रिफाइनरियों के कार्यों की लेखा परीक्षा :

विभीन्न क्षेत्रों में रिफाइनरी के प्रदर्शन का मूल्यांकन आवश्यक है, जैसे ऊर्जा, संचालन, रखरखाव इत्यादि, उ.प्रौ.के. की कार्यसमिति की बैठक के दौरान यह व्यक्त किया गया की उपरोक्त कथन के अनुसार, उ.प्रौ.के. सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों के कार्यों का परीक्षण करता है।

उ.प्रौ.के. की समन्वयकता के अधीन तेल कंपनियों एवं इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के सदस्यों की संयुक्त कार्य लेखा परीक्षा टीम का गठन किया जाता है। इसमें विभिन्न तरीकों के कार्यों के लिए आंकड़ों का खाका तैयार करना, आंकड़ों का संकलन एवं वैधीकरण, कार्यक्रम को अंतिम रूप देना एवं लेखा परीक्षा इत्यादि शामिल है।

7. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा गठित समिति द्वारा ऑटो फ्यूल पॉलिसी की समीक्षा :

ऑटो फ्यूल पॉलिसी के तहत, अक्टूबर, 2003 में मंजूर किए गए यूरो-IV के उत्सर्जन मानदंडों के बराबर पूरे देश में 1 अप्रैल 2010 से 11 बड़े शहरों तथा यूरो –III के उत्सर्जन मानदंडों का पूरे देश में साथ-साथ लागू करना इस विषय की समीक्षा की जा रही है।

तदनुसार, पेट्रोलियम गैस मंत्रालय ने एक कार्यालय ज्ञापन के जरिये अध्यक्ष, वैज्ञानिक सलाहकार समिति को अध्यक्ष सहित कार्यकारी निदेशक, उच्च प्रोद्योगिकी केंद्र, कार्यकारी निदेशक, इंडियन ऑयल कॉ. लि. – आर. एंड. डी., की एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जोकि ऑटो ईंधन नीति की समीक्षा के लिए सदस्य है।

संदर्भ की शर्तों के अनुसार, 2010/01/04 के लिए ऑटो ईंधन नीति के लक्ष्यों की समीक्षा के लिए श्रोत प्रभाजन छह शहरों मे विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए अध्ययन पर आधारित हो जोकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधीन की जा रही है एवं अन्य संबन्धित सामग्री पर आधारित है।

इसके अलावा , उ.प्रौ.के. के नोडल एजेंसी के रूप में समिति को तकनीकी और सचिवीय सेवाएँ उपलब्ध करानेनका कार्य करेगा और यह समिति छह महीने की अवधि के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

समिति ने कई बार तेल उद्योग और पेट्रोफेड, आटोमोबाइल एसोसिएशन (सियाम) के साथ ही ए आर ए आई , सरकारी एजेंसियों की ओर से विभिन्न हितधारकों के साथ\ मिलकर विचार-विमर्श किया।
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रड बोर्ड, पी. पी. ए. सी. इत्यादि ने समिति के लिए अमूल्य जानकारी प्रदान की।
बाद में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने समिति के जनादेश का विस्तार करते हुए अपनी\ अंतिम रिपोर्ट में एलपीजी / सीएनजी / H2-सीएनजी कॉ ऑटो ईंधन के रूप मे शामिल किया है।

समिति एलपीजी / सीएनजी / H2-सीएनजी ऑटो इंधन के रूप में इन\ का उपयोग करने संबंधी सभी पहलुओं की जांच करेगी ( अन्य बातों के साथ उत्सर्जन में कमी, अर्थशास्त्र और देश में गैस की उपलब्धता ).
समिति ने सभी अंश धारकों जैसे इंडियन ऑयल कॉ. लि. – अनु. एवं विकास , भारत पेट्रोलियम कॉ. लि., हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉ. लि., गेल इंडिया, पी.पी.ए.सी., एस.आई.ए.एम., ए.आर.ए.आई., नीरी, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राज्य पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ छह बैठकें की।

अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

8. उ.प्रौ.के. प्रकाशन :

नवीनतम विकास / रुझानों, जोकि विश्व भर में पेट्रोलियम परिष्करण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को, पंक्तिबद्ध करने के लिए , उ.प्रौ.के. “ टेक्नोलोजी स्कैन ” और “ सी.एच.टी. बुलेटिन ” प्रकाशित करता है।

टेक्नोलोजी स्कैन :
उ.प्रौ.के. का यह त्रैमासिक प्रकाशन पेट्रोलियम उद्योग से संबन्धित विभिन्न तकनीकी प्रकाशनों से खोजकर एवं संकलन कर, इस संदर्भ बुलेटिन में शामिल किया जाता है।

उ.प्रौ.के. बुलेटिन :
उ.प्रौ.के. तिमाही आधार पर उ.प्रौ.के. बुलेटिन का प्रकाशन करता है।
यह सितंबर 2003 में उ.प्रौ.के. के कार्यकलापों की जानकारी देने के लिए, मासिक आधार पर शुरू किया गया था । इसमें पेट्रोलियम उद्योग से संबन्धित समाचार / लेख इत्यादि शामिल किए जाते हैं।

उ.प्रौ.के. की तकनीकी पत्रिकाओं के प्रकाशन की समीक्षा की गयी और बाद में यह निर्णय लिया गया की यह भी त्रैमासिक आधार पर प्रकाशित किया जाए।

9. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को तकनीकी सहायता

विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए अनुप्रयोगों की समीक्षा :
उ.प्रौ.के. विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग के अनुप्रयोग की जांच करके, टिप्पणियाँ तैयार करता है और आगे की कार्यवाई के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजता है।

विभिन्न रिफाइनरी पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए अनिवार्यता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए टिप्पणियाँ : पेट्रोलियम और प्रकृतिक गैस मंत्रालय की वृहत प्रौद्योगिकी सहयोग का हिस्सा होने के नाते उ.प्रौ.के. प्रस्तावों की जांच के बाद विभिन्न परियोजना मदों के आयात के लिए अनिवार्यता प्रमाण पत्र जारी करता है एवं अपनी टिप्पणी एवं संस्तुतियाँ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजता है।

10. वैज्ञानिक सलाहकार समिति ( एस. ए. सी.)
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वर्ष 1981 में हयड्रोकार्बन जैसे कच्चे वस्तु को ईंधन और रसायन के रूप में अधिकतम प्रसंस्करण सुनिश्चित करने के लिए, भारत सरकार को सलाह देने के लिए हाइड्रोकार्बन पर वैज्ञानिक सलाहकार समिति का गठन किया।

उद्देश्य
  • विभिन्न अनुसंधान एवं विकास संगठनों / शैक्षणिक संस्थानों द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुसन्धानों एवं विकास प्रस्तावों की जांच एवं विचार-विमर्श के बाद उपयुक्त प्रस्तावों को उ.प्रौ.के. / ओ. आई. डी. बी. द्वारा वित्त पोषण के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को सिफ़ारिश करना।
  • स्वदेशी प्रक्रियाओं के अंगीकरण के लिए दीर्घकालीन प्रौद्योगिकी योजनाओं एवं उपयुक्त यंत्रीकरण की पहचान करने एक सहयोगात्मक भूमिका निभाना।
  • हाइड्रोकार्बन उद्योग में प्रभावी सुधारों के लिए नए विचारों एवं परिवर्तन का समर्थन करना।

विभिन्न आर्थिक मंत्रालयों के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा वर्ष 1980 के आरंभ में गठित की गयी, विभिन्न सलाहकार समितियों में से हाइड्रोकार्बन्स पर वैज्ञानिक सलाहकार समिति, इस प्रकार की केवल एक ऐसी समिति है जो वर्ष 1981 में इसके गठन के बाद से निर्बाध रूप से कार्य कर रही है।

उ.प्रौ.के., पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तकनीकी सहयोग विंग के रूप में अपनी क्षमता के अनुसार निम्न कार्य कर रहा है :
  • वैज्ञानिक सलाहकार समिति का संचालन
  • वैज्ञानिक सलाहकार समिति द्वारा संस्तुत परियोजनाओं के लिए उ.प्रौ.के. की कार्यकारी समिति / शासी परिषद से अनुमोदन प्राप्त करना
  • तेल उद्योग विकास बोर्ड की निधि का प्रबंध
  • परियोजनाओं की जांच एवं आगे की कारवाई

वैज्ञानिक सलाहकार समिति, हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को संगठित करने के लिए अहम भूमिका निभाता है : उदाहरण के लिए
  • राष्ट्रिय प्रयोगशालाओं के सहयोग के लिए ई.आई.एल. – आर.एंड.डी. सेंटर की स्थापना।
  • भारतीय पेट्रोलियम संस्थान में अनुसंधान सुविधाओं एवं प्रयोगिक सयंत्रों का आधुनिकीकरण।
  • कोच्चि रिफाइनरी एवं चेन्नई पेट्रोलियम कॉ. ली. में स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों की स्थापना।

वैज्ञानिक सलाहकार समिति एवं उच्च प्रौद्योगिकी केंद्र अपने गठन के समय से ही हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में तकनीकियों के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
  • पेट्रोलियम उत्तपादों की गुणवत्ता के उन्नयन के लिए रिफाइनरियों का मार्गदर्शन
  • रिफाइनरी मार्जिन में सुधार के लिए मूल्यवर्धन
  • पर्यावरण बचाव के कड़े नियमों को अपनाने के उपाय

11. हाइड्रोजन कॉपर्स फंड (एच.सी.एफ.)

गठन :
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जून 2003 में तेल उद्योग विकास बोर्ड एवं सार्वजनिक क्षेत्र के तेल कंपनियों के सहयोग से हाइड्रोकार्बन कॉर्पस फंड की स्थापना की।

उद्देश्य :
  1. स्वदेशी तकनीकी के द्वारा हाइड्रोकार्बन का एक वैकल्पिक ईंधन के रूप मे विकास
  2. अनुसंधान एवं विकास प्रक्रियाओं को सरल बनाना
  3. तेल कंपनियों / संस्थानों के बीच हाइड्रोकार्बन प्रक्रियाओं के विकास से संबन्धित कार्यों में समन्वय स्थापित करना
  4. प्रशिक्षण एवं क्षमता-वर्धन में सहयोग देना

हाइड्रोजन कॉर्पस फंड का आरंभिक कॉर्पस
  1. 100 करोड़ के अंश के साथ
    • ओ.आई.डी.बी. के 40 करोड़ रुपये
    • आई.ओ.सी., ओ.एन.जी.सी. एवं गेल के 16 करोड़ रुपये
    • बी.पी.सी.एल. एवं एच.पी.सी.एल. के 6 करोड़ रुपये
  2. फंड का प्रबंध तेल एवं विकास बोर्ड (ओ.आई.डी.बी.) द्वारा किया जाएगा
    परियोजनाओं का अनुमोदन नई नीतियों के अनुसार होता है
    हाइड्रोजन कॉर्पस फंड के अंतर्गत वित्त के लिए, प्रक्रिया एवं अनुमोदन को सरल बनाने के लिए, नई नीतियाँ जून 2009 में बनाई गयी थी :
    • उच्च प्रौद्योगिकी केंद्र, एच2 परियोजना एवं संबन्धित गतिविधियों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
    • वैज्ञानिक सलाहकार समिति (एस.ए.सी.) हाइड्रोजन कॉर्पस फंड के लिए तकनीकी समिति के रूप में कार्य करेगी।
    • हाइड्रोजन कॉर्पस फंड के अंतर्गत सभी प्रस्ताव उच्च प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा प्रपता किए जाएंगे और उन्हें अनुमोदन के लिए वैज्ञानिक सलाहकार समिति को भेजा जाएगा।
    • वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अनुमोदन के बाद तेल उद्योग विकास बोर्ड (ओ.आई.डी.बी.) से वित्त सहमति ली जाएगी।
    • वैज्ञानिक सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित एवं ओ.आई.डी.बी. द्वारा वित्त-सहमति के बाद, प्रस्तावों को सचिव पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अध्यक्षता वाली संचालन समिति के समक्ष अनुमोदन ले लिए रखा जाएगा।

संचालन समिति :-
  • अध्यक्ष : सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
  • सदस्य
  • अतिरिक्त सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
  • अतिरिक्त सचिव / संयुक्त सचिव एवं वित्त सलाहकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
  • सचिव, ओ.आई.डी.बी.
  • कार्यकारी निदेशक, उच्च प्रोद्योगिकी केंद्र
  • प्रयोजक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी
  • आई.ओ.सी., बी.पी.सी.एल. एवं एच.पी.सी.एल. के अनुसंधान एवं विकास के मुख्य अधिकारी
  • निदेशक(आर. एंड. ए.), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय संचालन समिति के संयोजक के रूप में कार्य करेंगे।

एच2 अनुसंधान का विस्तृत क्षेत्र (चिन्हित)

1. हाइड्रोजन उत्पादन
- वाष्प रिफ़ार्मिंग
- इलेक्ट्रोलाइसिस
- उच्च ताप इलेक्ट्रोलाइसिस
- फोटो इलेक्ट्रो-कैमिकल वाटर स्पिलिटिंग
- कोल गैसीफिकेशन
- फोटो बायोलोजिकल
- थर्मो-केमिकल

2. हाइड्रोजन भंडारण
- मैटल हाईड्राइड्स
- केमिकल स्टोरेज
- कार्बन मैटीरियल
- संपीडित गैस या तरल हाइड्रोजन टैंक

3. हाइड्रोजन वितरण
- हाइड्रोजन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकल्प का विश्लेषण
- हाइड्रोजन पाइपलाइन की वस्तु एवं लागत
- हाइड्रोजन संपीडन एवं तरलता
- गैस या तरल का रोड या रेल परिवहन विकल्प
- संवाहकों की क्षमता एवं लागत

4. हाइड्रोजन उपयोग
- सी.एन.जी. इंजनों में एच2-सी.एन.जी. मिक्सर का उपयोग ( सुधार के साथ / बिना )
- स्वच्छ हाइड्रोजन इंजनों का विकास
- फ्युल सेल का विकास

 

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